हियँ हरषे सुर सेन निहारी

चौपाई २, दोहा ९५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हियँ हरषे सुर सेन निहारी। हरिहि देखि अति भए सुखारी॥ सिव समाज जब देखन लागे। बिडरि चले बाहन सब भागे॥ २ ॥

अर्थ

देवताओं के समाज को देखकर सब मन में प्रसन्न हुए और हरि को देखकर तो बहुत ही सुखी हुए। किन्तु जब शिवजी के दल को देखने लगे तब तो उनके सब वाहन (सवारियों के हाथी, घोड़े, रथ के बैल आदि) डरकर भाग चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात