जगदंबा जहँ अवतरी सो पुरु बरनि

दोहा ९४ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

जगदंबा जहँ अवतरी सो पुरु बरनि कि जाइ। रिद्धि सिद्धि संपत्ति सुख नित नूतन अधिकाइ॥ ९४ ॥

अर्थ

जिस नगर में स्वयं जगदम्बा ने अवतार लिया, क्या उसका वर्णन हो सकता है? वहाँ ऋद्धि, सिद्धि, सम्पत्ति और सुख नित-नये बढ़ते जाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का दोहा ९४ है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात