चली सुभग कबिता सरिता सो
चली सुभग कबिता सरिता सो
चौपाई ६, दोहा ३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चली सुभग कबिता सरिता सो। राम बिमल जस जल भरिता सो॥ सरजू नाम सुमंगल मूला। लोक बेद मत मंजुल कूला॥ ६ ॥
अर्थ
उससे वह सुन्दर कविता-रूपी नदी बह निकली, जिसमें श्रीरामजी का निर्मल यशरूपी जल भरा है। इसका नाम सरयू है, जो सम्पूर्ण सुन्दर मंगलों की जड़ है। लोक वेद मत इसके दो सुन्दर किनारे हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य