नाम हमार एकतनु भाई
नाम हमार एकतनु भाई
चौपाई ४, दोहा १६२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नाम हमार एकतनु भाई। सुनि नृप बोलेउ पुनि सिरु नाई॥ कहहु नाम कर अरथ बखानी। मोहि सेवक अति आपन जानी॥ ४ ॥
अर्थ
हे भाई! हमारा नाम एकतनु है। यह सुनकर राजा ने फिर सिर नवाकर कहा--मुझे अपना अत्यन्त सेवक जानकर अपने नाम का अर्थ समझाकर कहिये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा