आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै
आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै
दोहा १६२ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै मोरि। नाम एकतनु हेतु तेहि देह न धरी बहोरि॥ १६२ ॥
अर्थ
जब सबसे पहले सृष्टि उत्पन्न हुई थी, तभी मेरी उत्पत्ति हुई थी। तब से मैंने फिर दूसरी देह नहीं धारण की, इसी से मेरा नाम एकतनु है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का दोहा १६२ है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा