जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा

चौपाई ३, दोहा १६२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा। तिमि तिमि नृपहि उपज बिस्वासा॥ देखा स्वबस कर्म मन बानी। तब बोला तापस बगध्यानी॥ ३ ॥

अर्थ

ज्यों-ज्यों वह तपस्वी उदासीनता की बातें कहता था, त्यों-ही-त्यों राजा को विश्वास उत्पन्न होता जाता था। जब उस बगुले की तरह ध्यान लगाने वाले (कपटी) मुनि ने राजा को कर्म, मन और वचन से अपने वश में जाना, तब वह बोला--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा