मोद प्रमोद बिबस सब माता
मोद प्रमोद बिबस सब माता
चौपाई १, दोहा ३४६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मोद प्रमोद बिबस सब माता। चलहिं न चरन सिथिल भए गाता॥ राम दरस हित अति अनुरागीं। परिछनि साजु सजन सब लागीं॥ १ ॥
अर्थ
सुख और महान् आनन्द से विवश होने के कारण सब माताओं के शरीर शिथिल हो गये हैं, उनके चरण चलते नहीं हैं। श्रीरामचन्द्रजी के दर्शन के लिये वे अत्यन्त अनुराग में भरकर परिछन का सब सामान सजाने लगीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना