बिबिध बिधान बाजने बाजे

चौपाई २, दोहा ३४६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बिबिध बिधान बाजने बाजे। मंगल मुदित सुमित्राँ साजे॥ हरद दूब दधि पल्लव फूला। पान पूगफल मंगल मूला॥ २ ॥

अर्थ

अनेक प्रकार के बाजे बजते थे। सुमित्राजी ने आनन्दपूर्वक मंगल-साज सजाये। हल्दी, दूब, दही, पत्ते, फूल, पान और सुपारी आदि मंगल-मूल वस्तुएँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना