दिए दान बिप्रन्ह बिपुल पूजि गनेस

दोहा ३४५ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

दिए दान बिप्रन्ह बिपुल पूजि गनेस पुरारि। प्रमुदित परम दरिद्र जनु पाइ पदारथ चारि॥ ३४५ ॥

अर्थ

गणेशजी और त्रिपुरारि शिवजी का पूजन करके उन्होंने ब्राह्मणों को बहुत-सा दान दिया। वे ऐसी परम प्रसन्न हुईं, मानो अत्यन्त दरिद्री चारों पदार्थ पा गया हो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का दोहा ३४५ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना