माया बिबस भए मुनि मूढ़ा

चौपाई २, दोहा १३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

माया बिबस भए मुनि मूढ़ा। समुझी नहिं हरि गिरा निगूढ़ा॥ गवने तुरत तहाँ रिषिराई। जहाँ स्वयंबर भूमि बनाई॥ २ ॥

अर्थ

भगवान्‌ की माया के वशीभूत हुए मुनि ऐसे मूढ़ हो गये कि वे भगवान्‌ की निगूढ़ वाणी को भी न समझ सके। ऋषिराज नारदजी तुरंत वहाँ गये जहाँ स्वयंवर की भूमि बनायी गयी थी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग