मति कीरति गति भूति भलाई
मति कीरति गति भूति भलाई
चौपाई ३, दोहा ३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई॥ सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ॥ ३ ॥
अर्थ
उनमें से जिसने जिस समय जहाँ कहीं भी किसी भी यत्न से बुद्धि, कीर्ति, सद्गति, विभूति (ऐश्वर्य) और भलाई पाई है, उसे सत्संग का ही प्रभाव समझना चाहिए। वेदों में और लोक में इनकी प्राप्ति का दूसरा कोई उपाय नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “ब्राह्मण संत वन्दना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ब्राह्मणों और संतों की महिमा, समभाव और लोककल्याणकारी कृपा का स्तुतिपूर्ण नमन का वर्णन है।
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ब्राह्मण संत वन्दना