बिनु सतसंग बिबेक न होई
बिनु सतसंग बिबेक न होई
चौपाई ४, दोहा ३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥ सतसंगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला॥ ४ ॥
अर्थ
सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और श्रीरामजी की कृपा के बिना वह सत्संग सहज में मिलता नहीं। सत्संगति आनन्द और कल्याण की जड़ है। सत्संग की सिद्धि (प्राप्ति) ही फल है और सब साधन तो फूल हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “ब्राह्मण संत वन्दना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ब्राह्मणों और संतों की महिमा, समभाव और लोककल्याणकारी कृपा का स्तुतिपूर्ण नमन का वर्णन है।
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ब्राह्मण संत वन्दना