मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे
मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे
दोहा २९६ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे बनाइ। बीथीं सींचीं चतुरसम चौकें चारु पुराइ॥ २९६ ॥
अर्थ
लोगों ने अपने-अपने घरों को सजाकर मङ्गलमय बना लिया। गलियों को चतुरसम से सींचा और [द्वारों पर] सुन्दर चौक पुराये। [चन्दन, केशर, कस्तूरी और कपूर से बने हुए एक सुगन्धित द्रव को चतुरसम कहते हैं]।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का दोहा २९६ है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान