ध्वज पताक पट चामर चारू

चौपाई ४, दोहा २९६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

ध्वज पताक पट चामर चारू। छावा परम बिचित्र बजारू॥ कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब दधि अच्छत माला॥ ४ ॥

अर्थ

ध्वजा, पताका, परदे और सुन्दर चँवरों से सारा बाजार बहुत ही अनूठा छाया हुआ है। सोने के कलश, तोरण, मणियों की झालरें, हलदी, दूब, दही, अक्षत और मालाओं से--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान