मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार
मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार
दोहा ३०३ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार। जनु सब साचे होन हित भए सगुन एक बार॥ ३०३ ॥
अर्थ
सभी मंगलमय, कल्याणमय और मनोवांछित फल देनेवाले शकुन मानो सच्चे होने के लिए एक ही साथ हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का दोहा ३०३ है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान