छेमकरी कह छेम बिसेषी
छेमकरी कह छेम बिसेषी
चौपाई ४, दोहा ३०३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
छेमकरी कह छेम बिसेषी। स्यामा बाम सुतरु पर देखी॥ सनमुख आयउ दधि अरु मीना। कर पुस्तक दुइ बिप्र प्रबीना॥ ४ ॥
अर्थ
क्षेमकरी (सफेद सिरवाली चील) विशेष रूप से क्षेम (कल्याण) कह रही है। श्यामा बायीं ओर सुन्दर पेड़ पर दिखाई पड़ी। दही, मछली और दो विद्वान् ब्राह्मण हाथ में पुस्तक लिये हुए सामने आये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान