मंगल मूल लगन दिनु आवा

चौपाई ३, दोहा ३१२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मंगल मूल लगन दिनु आवा। हिम रितु अगहनु मासु सुहावा॥ ग्रह तिथि नखतु जोगु बर बारू। लगन सोधि बिधि कीन्ह बिचारू॥ ३ ॥

अर्थ

मंगल मूल लग्न का दिन आ गया। हेमन्त-ऋतु और सुहावना अगहन का महीना था। ग्रह, तिथि, नक्षत्र, योग और वार श्रेष्ठ थे। लग्न (मुहूर्त) शोधकर ब्रह्माजी ने उस पर विचार किया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
बारात का जनकपुर में स्वागत