कहत राम जसु बिसद बिसाला

चौपाई २, दोहा ३१२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कहत राम जसु बिसद बिसाला। निज निज भवन गए महिपाला॥ गए बीति कछु दिन एहि भाँती। प्रमुदित पुरजन सकल बराती॥ २ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी का निर्मल और महान् यश कहते हुए राजा लोग अपने-अपने घर गये। इस प्रकार कुछ दिन बीत गये। जनकपुर निवासी और बराती सभी बड़े आनन्दित हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३१२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत