पठै दीन्हि नारद सन सोई

चौपाई ४, दोहा ३१२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पठै दीन्हि नारद सन सोई। गनी जनक के गनकन्ह जोई॥ सुनी सकल लोगन्ह यह बाता। कहहिं जोतिषी आहिं बिधाता॥ ४ ॥

अर्थ

और उस (लग्नपत्रिका) को नारदजी के हाथ [जनकजी के यहाँ] भेज दिया। जनकजी के ज्योतिषियों ने भी वही गणना कर रखी थी। जब सब लोगों ने यह बात सुनी, तब वे कहने लगे—यहाँ के ज्योतिषी भी ब्रह्मा ही हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत