मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस

दोहा ३५९ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस एहि भाँति। उमगी अवध अनंद भरि अधिक अधिक अधिकाति॥ ३५९ ॥

अर्थ

नित्य ही मंगल, आनन्द और उत्सव होते हैं; इस तरह आनन्द में दिन बीतते जाते हैं। अयोध्या आनन्द से भरकर उमड़ पड़ी, आनन्द की अधिकता अधिक-अधिक बढ़ती ही जा रही है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का दोहा ३५९ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना