सुदिन सोधि कल कंकन छोरे
सुदिन सोधि कल कंकन छोरे
चौपाई १, दोहा ३६० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुदिन सोधि कल कंकन छोरे। मंगल मोद बिनोद न थोरे॥ नित नव सुखु सुर देखि सिहाहीं। अवध जन्म जाचहिं बिधि पाहीं॥ १ ॥
अर्थ
अच्छा दिन (शुभ मुहूर्त) शोधकर सुन्दर कंकन छोड़े गये। मंगल, आनन्द और विनोद कुछ कम नहीं हुए (अर्थात् बहुत हुए)। इस प्रकार नित्य नये सुख को देखकर देवता सिहाते हैं और अयोध्या में जन्म पाने के लिये ब्रह्माजी से याचना करते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना