मंदिर महँ सब राजहिं रानीं

चौपाई ४, दोहा १९० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मंदिर महँ सब राजहिं रानीं। सोभा सील तेज की खानीं॥ सुख जुत कछुक काल चलि गयऊ। जेहिं प्रभु प्रगट सो अवसर भयऊ॥ ४ ॥

अर्थ

शोभा, शील और तेज की खान [बनी हुई] सब रानियाँ महल में सुशोभित हुईं। इस प्रकार कुछ समय सुखपूर्वक बीता और वह अवसर आ गया जिसमें प्रभु को प्रकट होना था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और रानियों के गर्भवती होने का वर्णन है।

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दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ