मज्जन फल पेखिअ ततकाला
मज्जन फल पेखिअ ततकाला
चौपाई १, दोहा ३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला॥ सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई॥ १ ॥
अर्थ
इस तीर्थराज में स्नान का फल तत्काल ऐसा देखने में आता है कि कौए कोयल बन जाते हैं और बगुले हंस। यह सुनकर कोई आश्चर्य न करे, क्योंकि सत्संग की महिमा छिपी नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “ब्राह्मण संत वन्दना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में ब्राह्मणों और संतों की महिमा, समभाव और लोककल्याणकारी कृपा का स्तुतिपूर्ण नमन का वर्णन है।
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ब्राह्मण संत वन्दना