सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं
सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं
दोहा २ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग। लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग॥ २ ॥
अर्थ
जो मनुष्य इस संत-समाजरूपी तीर्थराजका प्रभाव प्रसन्न मनसे सुनते और समझते हैं और फिर अत्यन्त प्रेमपूर्वक इसमें गोते लगाते हैं, वे इस शरीरके रहते ही धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष-- चारों फल पा जाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “गुरु वन्दना” प्रकरण का दोहा २ है। इस प्रकरण में गुरु-चरण-वन्दना और उनकी कृपा से अज्ञान-नाश तथा रामकथा-बोध का वर्णन है।
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गुरु वन्दना