महि पाताल नाक जसु ब्यापा

चौपाई ३, दोहा २६५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

महि पाताल नाक जसु ब्यापा। राम बरी सिय भंजेउ चापा॥ करहिं आरती पुर नर नारी। देहिं निछावरि बित्त बिसारी॥ ३ ॥

अर्थ

पृथ्वी, पाताल और स्वर्ग तीनों लोकों में यश फैल गया कि श्रीरामचन्द्रजी ने धनुष तोड़ दिया और सीताजी को वरण कर लिया। नगर के नर-नारी आरती कर रहे हैं और अपनी पूँजी भुलाकर निछावर कर रहे हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

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जयमाल पहनाना