सोहति सीय राम कै जोरी
सोहति सीय राम कै जोरी
चौपाई ४, दोहा २६५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सोहति सीय राम कै जोरी। छबि सिंगारु मनहुँ एक ठोरी॥ सखीं कहहिं प्रभुपद गहु सीता। करति न चरन परस अति भीता॥ ४ ॥
अर्थ
श्रीसीता-रामजी की जोड़ी ऐसी सुशोभित हो रही है मानो सुन्दरता और श्रृंगाररस एकत्र हो गये हों। सखियाँ कह रही हैं—सीते! स्वामी के चरण छुओ; किन्तु सीताजी अत्यन्त भयभीत होकर उनके चरण नहीं छूतीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना