बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु

दोहा २२७ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत। परम रम्य आरामु यहु जो रामहि सुख देत॥ २२७ ॥

अर्थ

बाग और सरोवर को देखकर प्रभु श्रीरामचन्द्रजी भाई लक्ष्मण सहित हर्षित हुए। यह बाग [वास्तव में] परम रमणीय है, जो [जगत् को सुख देनेवाले] श्रीरामचन्द्रजी को सुख दे रहा है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का दोहा २२७ है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।

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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन