लोकहुँ बेद सुसाहिब रीती
लोकहुँ बेद सुसाहिब रीती
चौपाई ३, दोहा २८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
लोकहुँ बेद सुसाहिब रीती। बिनय सुनत पहिचानत प्रीती॥ गनी गरीब ग्राम नर नागर। पंडित मूढ़ मलीन उजागर॥ ३ ॥
अर्थ
लोक और वेद में भी अच्छे स्वामी की यही रीति प्रसिद्ध है कि वह विनय सुनते ही प्रेम को पहचान लेता है। अमीर-गरीब, गँवार-नगरनिवासी, पण्डित-मूढ़, मलीन-उजागर,
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा