सुकबि कुकबि निज मति अनुहारी

चौपाई ४, दोहा २८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुकबि कुकबि निज मति अनुहारी। नृपहि सराहत सब नर नारी॥ साधु सुजान सुसील नृपाला। ईस अंस भव परम कृपाला॥ ४ ॥

अर्थ

सुकवि-कुकवि, सभी नर-नारी अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार राजा की सराहना करते हैं। और साधु, सुजान, सुशील, ईश्वर के अंश से उत्पन्न परम कृपालु राजा--

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।

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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा