मोरि सुधारिहि सो सब भाँती
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती
चौपाई २, दोहा २८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥ राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि देखि दयानिधि पोसो॥ २ ॥
अर्थ
वे (श्रीरामजी) मेरी [बिगड़ी] सब तरह से सुधार लेंगे; जिनकी कृपा कृपा करने से नहीं अघाती। राम-से उत्तम स्वामी और मुझ-सरीखा बुरा सेवक! इतने पर भी उन दयानिधि ने अपनी ओर देखकर मेरा पालन किया है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा