लोभी लोलुप कल कीरति चहई

चौपाई २, दोहा २६७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

लोभी लोलुप कल कीरति चहई। अकलंकता कि कामी लहई॥ हरि पद बिमुख परम गति चाहा। तस तुम्हार लालचु नरनाहा॥ २ ॥

अर्थ

लोभी-लालची सुन्दर कीर्ति चाहे, कामी मनुष्य निष्कलंकता [चाहे तो] क्या पा सकता है? और जैसे श्रीहरि के चरणों से विमुख मनुष्य परम गति (मोक्ष) चाहे, हे राजाओ ! सीता के लिए तुम्हारा लालच भी वैसा ही व्यर्थ है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

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जयमाल पहनाना