बैनतेय बलि जिमि चह कागू

चौपाई १, दोहा २६७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बैनतेय बलि जिमि चह कागू। जिमि ससु चहै नाग अरि भागू॥ जिमि चह कुसल अकारन कोही। सब संपदा चहै सिवद्रोही॥ १ ॥

अर्थ

जैसे गरुड़ का भाग कौआ चाहे, जैसे ससु का भाग नाग-शत्रु चाहे, बिना कारण क्रोध करनेवाला अपनी कुशल चाहे, शिवद्रोही सब सम्पदा चाहे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

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जयमाल पहनाना