कोलाहलु सुनि सीय सकानी

चौपाई ३, दोहा २६७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कोलाहलु सुनि सीय सकानी। सखीं लवाइ गईं जहँ रानी॥ रामु सुभायँ चले गुरु पाहीं। सिय सनेहु बरनत मन माहीं॥ ३ ॥

अर्थ

कोलाहल सुनकर सीताजी शंकित हो गयीं। तब सखियाँ उन्हें वहाँ ले गयीं जहाँ रानी थीं। श्रीरामचन्द्रजी मन में सीताजी के प्रेम का बखान करते हुए स्वाभाविक चाल से गुरुजी के पास चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

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जयमाल पहनाना