भयउ समउ अब धारिअ पाऊ

चौपाई ४, दोहा ३१३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भयउ समउ अब धारिअ पाऊ। यह सुनि परा निसानहिं घाऊ॥ गुरहि पूछि करि कुल बिधि राजा। चले संग मुनि साधु समाजा॥ ४ ॥

अर्थ

[उन्होंने जाकर विनती की--] समय हो गया, अब पधारिए। यह सुनते ही नगाड़ों पर चोट पड़ी। गुरु से पूछकर और कुल की विधि करके राजा मुनियों और साधुओं के समाज को साथ लेकर चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत