लेहु नयन भरि रूप निहारी
लेहु नयन भरि रूप निहारी
चौपाई २, दोहा ३३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
लेहु नयन भरि रूप निहारी। प्रिय पाहुने भूप सुत चारी॥ को जानै केहिं सुकृत सयानी। नयन अतिथि कीन्हे बिधि आनी॥ २ ॥
अर्थ
राजा के चारों पुत्र, इन प्यारे मेहमानों के [मनोहर] रूप को नेत्र भरकर देख लो। हे सयानी! कौन जाने, किस पुण्य से विधाता ने इन्हें यहाँ लाकर हमारे नेत्रों का अतिथि किया है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह