चारिउ भाइ सुभायँ सुहाए
चारिउ भाइ सुभायँ सुहाए
चौपाई १, दोहा ३३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चारिउ भाइ सुभायँ सुहाए। नगर नारि नर देखन धाए॥ कोउ कह चलन चहत हहिं आजू। कीन्ह बिदेह बिदा कर साजू॥ १ ॥
अर्थ
स्वभाव से ही सुन्दर चारों भाइयों को देखने के लिये नगर के स्त्री-पुरुष दौड़े। कोई कहता है—आज ये जाना चाहते हैं। विदेह ने विदाई का साज तैयार कर लिया है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह