मरनसीलु जिमि पाव पिऊषा
मरनसीलु जिमि पाव पिऊषा
चौपाई ३, दोहा ३३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मरनसीलु जिमि पाव पिऊषा। सुरतरु लहै जनम कर भूखा॥ पाव नारकी हरिपदु जैसें। इन्ह कर दरसनु हम कहँ तैसें॥ ३ ॥
अर्थ
मरनेवाला जिस तरह अमृत पा जाय, जन्म का भूखा कल्पवृक्ष पा जाय और नरक में रहनेवाला जीव जैसे हरिपद को प्राप्त हो जाय, हमारे लिये इनके दर्शन वैसे ही हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह