चितवति चकित चहूँ दिसि सीता
चितवति चकित चहूँ दिसि सीता
चौपाई १, दोहा २३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चितवति चकित चहूँ दिसि सीता। कहँ गए नृपकिसोर मनु चिंता॥ जहँ बिलोक मृग सावक नैनी। जनु तहँ बरिस कमल सित श्रेनी॥ १ ॥
अर्थ
सीताजी चकित होकर चारों ओर देख रही हैं। मन इस बात की चिंता कर रहा है कि राजकुमार कहाँ चले गये। बालमृग-नयनी सीताजी जहाँ दृष्टि डालती हैं, वहाँ मानो श्वेत कमलों की कतार बरस जाती है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन