कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं
कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं
चौपाई ३, दोहा २७९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं। मो पर करिअ दास की नाईं॥ कहिअ बेगि जेहि बिधि रिस जाई। मुनिनायक सोइ करौं उपाई॥ ३ ॥
अर्थ
अतः हे स्वामी! कृपा, क्रोध, वध और बन्धन, जो कुछ करना हो, दास की तरह (अर्थात् दास समझकर) मुझ पर कीजिए। जिस प्रकार से शीघ्र आपका क्रोध दूर हो, हे मुनिराज! बताइए, मैं वही उपाय करूँ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद