कह मुनि राम जाइ रिस कैसें
कह मुनि राम जाइ रिस कैसें
चौपाई ४, दोहा २७९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें॥ एहि कें कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं काह कोपु करि कीन्हा॥ ४ ॥
अर्थ
मुनि ने कहा- हे राम! क्रोध कैसे जाए; अब भी तेरा छोटा भाई टेढ़ा ही ताक रहा है। इसकी गर्दन पर मैंने कुठार न चलाया, तो क्रोध करके किया ही क्या?
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद