रानिन्ह सहित सोचबस सीया
रानिन्ह सहित सोचबस सीया
चौपाई ४, दोहा २६७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रानिन्ह सहित सोचबस सीया। अब धौं बिधिहि काह करनीया॥ भूप बचन सुनि इत उत तकहीं। लखनु राम डर बोलि न सकहीं॥ ४ ॥
अर्थ
रानियों सहित सीताजी [दुष्ट राजाओं के दुर्बचन सुनकर] सोच के वश हैं कि न जाने विधाता अब क्या करनेवाले हैं। राजाओं के वचन सुनकर लक्ष्मणजी इधर-उधर ताकते हैं; किन्तु श्रीरामचन्द्रजी के डर से कुछ बोल नहीं सकते।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना