कोल कराल दसन छबि गाई
कोल कराल दसन छबि गाई
चौपाई ४, दोहा १५६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई॥ घुरुघुरात हय आरौ पाएँ। चकित बिलोकत कान उठाएँ॥ ४ ॥
अर्थ
यह तो सूअर के भयानक दाँतों की शोभा कही गयी। [इधर] उसका शरीर भी बहुत विशाल और मोटा था। घोड़े की आहट पाकर वह घुरघुराता हुआ कान उठाये चौकन्ना होकर देख रहा था।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
प्रतापभानु की कथा