को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें
को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें
चौपाई २, दोहा १५९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें। सुंदर जुबा जीव परहेलें॥ चक्रबर्ति के लच्छन तोरें। देखत दया लागि अति मोरें॥ २ ॥
अर्थ
तुम कौन हो? सुन्दर युवक होकर, जीवन की परवाह न करके, वन में अकेले क्यों फिर रहे हो? तुम्हारे चक्रवर्ती राजा के-से लक्षण देखकर मुझे बड़ी दया आती है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा