गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ
गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ
चौपाई १, दोहा १५९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ। निज आश्रम तापस लै गयऊ॥ आसन दीन्ह अस्त रबि जानी। पुनि तापस बोलेउ मृदु बानी॥ १ ॥
अर्थ
सारी थकावट मिट गयी, राजा सुखी हो गया। तब तपस्वी उसे अपने आश्रम में ले गया और सूर्यास्त का समय जानकर उसने [राजा को बैठने के लिये] आसन दिया। फिर वह तपस्वी कोमल वाणी से बोला--।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
प्रतापभानु की कथा