कीरति सरित छहूँ रितु रूरी

चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कीरति सरित छहूँ रितु रूरी। समय सुहावनि पावनि भूरी॥ हिम हिमसैलसुता सिव ब्याहू। सिसिर सुखद प्रभु जनम उछाहू॥ १ ॥

अर्थ

यह कीर्तिरूपिणी नदी छहों ऋतुओं में सुन्दर है। सभी समय यह परम सुहावनी और अत्यन्त पवित्र है। इसमें शिव-पार्वती का विवाह हेमन्त ऋतु है। श्रीरामचन्द्रजी के जन्म का उत्सव सुखदायी शिशिर ऋतु है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य