बरनब राम बिबाह समाजू

चौपाई २, दोहा ४२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बरनब राम बिबाह समाजू। सो मुद मंगलमय रितुराजू॥ ग्रीषम दुसह राम बनगवनू। पंथकथा खर आतप पवनू॥ २ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के विवाह-समाज का वर्णन ही आनन्द-मंगलमय ऋतुराज वसंत है। श्रीरामजी का वनगमन दुःसह ग्रीष्म-ऋतु है और मार्ग की कथा ही कड़ी धूप और लू है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य