समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग

दोहा ४१ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग। कलि अघ खल अवगुन कथन ते जलमल बग काग॥ ४१ ॥

अर्थ

सम्पूर्ण अनगिनत उत्पातों को शान्त करनेवाला भरतजी का चरित्र नदी-तट पर किया जानेवाला जपयज्ञ है। कलियुग के पापों और दुष्टों के अवगुणों के जो वर्णन हैं वे ही इस नदी के जल का कीचड़ और बगुले-कौए हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का दोहा ४१ है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य