रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब
रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब
दोहा ३२ (ख) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब काहु। सज्जन कुमुद चकोर चित हित बिसेषि बड़ लाहु॥ ३२ (ख) ॥
अर्थ
रामचरित पूर्णिमाके चन्द्रमा की किरणों के समान सभी को सुख देनेवाले हैं, परन्तु सज्जनरूपी कुमुदिनी और चकोर के चित्त के लिए तो विशेष हितकारी और महान लाभदायक हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का दोहा ३२ (ख) है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा