खल अघ अगुन साधु गुन गाहा
खल अघ अगुन साधु गुन गाहा
चौपाई १, दोहा ६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
खल अघ अगुन साधु गुन गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा॥ तेहि तें कछु गुन दोष बखाने। संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने॥ १ ॥
अर्थ
दुष्टों के पापों और अवगुणों की तथा साधुओं के गुणों की कथाएँ—दोनों ही अपार और अथाह समुद्र हैं। इसी से कुछ गुण और दोषों का वर्णन किया गया है, क्योंकि बिना पहचाने उनका ग्रहण या त्याग नहीं हो सकता।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “संत असंत वन्दना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में संत और असंत के स्वभाव तथा गुण-दोष के भेद का सूक्ष्म विवेचन का वर्णन है।
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संत असंत वन्दना