भलो भलाइहि पै लहइ लहइ निचाइहि

दोहा ५ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

भलो भलाइहि पै लहइ लहइ निचाइहि नीचु। सुधा सराहिअ अमरताँ गरल सराहिअ मीचु॥ ५ ॥

अर्थ

भला भलाई ही ग्रहण करता है और नीच नीचता को ही ग्रहण किये रहता है। अमृत की सराहना अमर करने में होती है और विष की मारने में।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “खल वन्दना” प्रकरण का दोहा ५ है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा खलों की वन्दना और उनके स्वभाव का परिचय का वर्णन है।

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खल वन्दना